₹67,270 करोड़ की लावारिस जमा राशि: क्या इसमें आपका भी पैसा है? जानिए इसे वापस पाने का आसान तरीका

1. प्रस्तावना: भारतीय बैंकों में पड़ा एक विशाल खजाना

क्या आपने कभी सोचा है कि आपके या आपके परिवार के किसी पुराने बैंक खाते में जमा राशि का क्या हुआ? सरकारी आंकड़ों (जुलाई 2025 तक) के अनुसार, भारतीय बैंकों में कुल ₹67,270 करोड़ की एक विशाल राशि ‘लावारिस’ (Unclaimed) पड़ी है। इसमें से ₹58,400 करोड़ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) में और लगभग ₹8,600 करोड़ निजी क्षेत्र के बैंकों के पास जमा हैं।

एक वित्तीय सलाहकार के तौर पर मैं आपको यह भरोसा दिलाना चाहता हूँ कि यह पैसा किसी बैंक या सरकार की संपत्ति नहीं बना है। यह आपका हक है। आरबीआई के नियमों के अनुसार, खाताधारक या उनके कानूनी वारिस इस राशि पर कभी भी दावा कर सकते हैं। यह मार्गदर्शिका आपको अपना पैसा खोजने और उसे वापस पाने की पूरी प्रक्रिया सरल भाषा में समझाएगी।

2. आपका पैसा ‘लावारिस’ (Unclaimed) कैसे बन जाता है?

बैंक खातों में लेन-देन बंद होने पर उन्हें उनकी स्थिति के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। नीचे दी गई तालिका से आप इसे बेहतर ढंग से समझ सकते हैं:

खाता स्थिति (Status)समय सीमा (Inactivity Period)ब्याज और विवरण
निष्क्रिय (Inoperative/Dormant)2 वर्षयदि 2 साल तक ग्राहक द्वारा कोई लेन-देन न किया जाए। इस पर बैंक की दर से ब्याज मिलता रहता है।
लावारिस (Unclaimed)10 वर्षयदि 10 साल तक खाते में कोई गतिविधि न हो या FD मैच्योर होने के बाद दावा न किया जाए।
DEA फंड में स्थानांतरण10 वर्ष के बाद10 साल की निरंतर निष्क्रियता के बाद, यह पैसा आरबीआई के Depositor Education and Awareness (DEA) फंड में भेज दिया जाता है।

3. UDGAM पोर्टल: अपना पैसा खोजने का डिजिटल समाधान

आरबीआई ने आपकी जमा राशि को खोजने के लिए UDGAM (Unclaimed Deposits-Gateway to Access inforMation) पोर्टल शुरू किया है। यह पोर्टल वर्तमान में 30 प्रमुख बैंकों को कवर करता है, जो कुल लावारिस राशि का लगभग 90% है।

पोर्टल पर खोजने की प्रक्रिया:

  1. पंजीकरण: udgam.rbi.org.in पर जाकर अपना नाम और मोबाइल नंबर दर्ज करें।
  2. व्यक्तिगत खोज (Individuals): खाताधारक का नाम और बैंक का चयन करें। इसके साथ PAN, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट या जन्म तिथि (DOB) में से कोई एक जानकारी दर्ज करें।
  3. गैर-व्यक्तिगत खोज (Non-Individuals): संस्थाओं/कंपनियों के मामले में संस्था का नाम, बैंक का चुनाव और CIN (Corporate Identification Number), पैन, पंजीकरण तिथि या अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता (Authorized Signatory) का नाम आवश्यक होगा।
  4. वैकल्पिक विकल्प: यदि आपके पास ऊपर दिए गए पहचान पत्र नहीं हैं, तो आप पते (Address) का उपयोग करके भी खोज कर सकते हैं।

UDRN का महत्व: सफल खोज के बाद, आपको एक UDRN (Unclaimed Deposit Reference Number) प्राप्त होगा। यह एक विशिष्ट नंबर है जो बैंक में दावा करते समय अनिवार्य होगा।

4. पैसे वापस पाने की 5-चरणीय प्रक्रिया

एक बार जब आप अपना पैसा ट्रैक कर लेते हैं, तो उसे वापस पाने के लिए इन चरणों का पालन करें:

  1. बैंक शाखा का चयन: आप अपनी मूल शाखा या बैंक की किसी भी अन्य शाखा (Choice of branch) में जा सकते हैं। एसबीआई जैसे बैंक अब ऑनलाइन दावा करने की सुविधा भी देते हैं।
  2. KYC दस्तावेजों का नवीनीकरण: आपको अपने नवीनतम फोटो, पहचान प्रमाण (Aadhaar, PAN, Voter ID) और पते का प्रमाण जमा करना होगा।
  3. दावा फॉर्म और UDRN: बैंक द्वारा निर्धारित ‘Unclaimed Deposits Claim Form’ भरें और UDGAM से प्राप्त UDRN का उल्लेख करें।
  4. वारिस या नॉमिनी के लिए प्रक्रिया: यदि खाताधारक की मृत्यु हो गई है, तो मृत्यु प्रमाण पत्र और कानूनी दस्तावेज (जैसे Succession Certificate) जमा करने होंगे।
    • विशेष नियम: ₹15 लाख तक के दावों के लिए प्रक्रिया सरल है और इसमें किसी ज़मानत (Surety) की आवश्यकता नहीं होती। लेकिन यदि दावा ₹15 लाख से अधिक है, तो बैंक आपसे अतिरिक्त दस्तावेज़ (Annex I-C के तहत Surety) मांग सकता है।
  5. सत्यापन और भुगतान: बैंक के सत्यापन के बाद, पैसा आपके सक्रिय खाते में ट्रांसफर कर दिया जाएगा।

5. ब्याज की गणना: क्या आपका पैसा बढ़ता रहेगा?

हाँ, आपका पैसा DEA फंड में जाने के बाद भी सुरक्षित रहता है और उस पर ब्याज मिलता है।

  • नियम: आरबीआई के अनुसार, लावारिस सावधि जमा (FD) पर ‘बचत खाते की ब्याज दर’ या ‘अनुबंधित दर’ (FD की मूल दर) में से जो भी कम हो, वह लागू होगी।
  • उदाहरण से समझिए: मान लीजिए आपकी पुरानी FD पर 7% ब्याज तय था। आज बैंक की बचत दर 3.5% है और वर्तमान FD दर 5% है। इस स्थिति में आपको 3.5% (सबसे कम दर) के हिसाब से ब्याज मिलेगा। यदि आपकी मूल FD दर केवल 3% थी, तो आपको 3% ही ब्याज मिलेगा।

6. महत्वपूर्ण अभियान: ‘आपका पैसा, आपका अधिकार’

भारत सरकार और आरबीआई वर्तमान में लावारिस राशि को उनके मालिकों तक पहुँचाने के लिए दो बड़े अभियान चला रहे हैं:

  • ‘आपका पैसा, आपका अधिकार’ अभियान: वित्त मंत्रालय द्वारा अक्टूबर से दिसंबर 2025 तक यह तीन महीने का राष्ट्रव्यापी अभियान चलाया जा रहा है। इसमें विशेष प्रदर्शनियों और स्टालों के माध्यम से नागरिकों को ‘ऑन-द-स्पॉट’ मार्गदर्शन और डिजिटल डेमो दिया जा रहा है।
  • आरबीआई प्रोत्साहन योजना: आरबीआई की यह योजना सितंबर 2026 तक चलेगी। इसके तहत बैंकों को पुराने दावों को तेजी से निपटाने और निष्क्रिय खातों को फिर से सक्रिय करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

7. निष्कर्ष और सुझाव: जागरूक बनिए, सतर्क रहिए!

एक विशेषज्ञ के रूप में मेरा सुझाव है कि आज ही अपने परिवार के साथ बैठकर एक ‘Financial Audit’ करें। पुराने कागजात चेक करें और देखें कि क्या कोई पुरानी पासबुक या FD सर्टिफिकेट कहीं छूट तो नहीं गया।

भविष्य के लिए सुरक्षा उपाय:

  • अपने सभी बैंक खातों में नामांकन (Nomination) अपडेट रखें।
  • पते या मोबाइल नंबर में बदलाव होने पर बैंक को तुरंत सूचित करें।
  • खातों को सक्रिय रखने के लिए साल में कम से कम एक बार लेनदेन जरूर करें।

जागरूक बनिए, सतर्क रहिए!

8. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: क्या नाबालिगों (Minors) के खाते भी लावारिस हो सकते हैं? उत्तर: हाँ, यदि नाबालिग के खाते में निर्धारित समय (10 वर्ष) तक कोई ग्राहक-प्रेरित लेनदेन नहीं होता है, तो उसे भी ‘लावारिस’ माना जाता है और पैसा DEA फंड में भेज दिया जाता है।

प्रश्न 2: क्या बैंक लावारिस पैसे को जब्त कर सकता है? उत्तर: बिल्कुल नहीं। जमाकर्ता या उनके कानूनी वारिस अनिश्चित काल तक कभी भी इस पैसे पर दावा कर सकते हैं।

प्रश्न 3: क्या लावारिस खाते से मेरे क्रेडिट स्कोर पर असर पड़ता है? उत्तर: नहीं, खाते के निष्क्रिय या लावारिस होने का आपके क्रेडिट स्कोर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

प्रश्न 4: क्या मैं बिना पासबुक के पैसे वापस पा सकता हूँ? उत्तर: हाँ, यदि मूल पासबुक खो गई है, तो आप बैंक को वैकल्पिक पहचान पत्र (OVD) और खाता विवरण देकर दावा प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।

₹67,270 करोड़ की लावारिस जमा राशि: क्या इसमें आपका भी पैसा है? जानिए इसे वापस पाने का आसान तरीका

1. प्रस्तावना: भारतीय बैंकों में पड़ा एक विशाल खजाना

क्या आपने कभी सोचा है कि आपके या आपके परिवार के किसी पुराने बैंक खाते में जमा राशि का क्या हुआ? सरकारी आंकड़ों (जुलाई 2025 तक) के अनुसार, भारतीय बैंकों में कुल ₹67,270 करोड़ की एक विशाल राशि ‘लावारिस’ (Unclaimed) पड़ी है। इसमें से ₹58,400 करोड़ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) में और लगभग ₹8,600 करोड़ निजी क्षेत्र के बैंकों के पास जमा हैं।

एक वित्तीय सलाहकार के तौर पर मैं आपको यह भरोसा दिलाना चाहता हूँ कि यह पैसा किसी बैंक या सरकार की संपत्ति नहीं बना है। यह आपका हक है। आरबीआई के नियमों के अनुसार, खाताधारक या उनके कानूनी वारिस इस राशि पर कभी भी दावा कर सकते हैं। यह मार्गदर्शिका आपको अपना पैसा खोजने और उसे वापस पाने की पूरी प्रक्रिया सरल भाषा में समझाएगी।

2. आपका पैसा ‘लावारिस’ (Unclaimed) कैसे बन जाता है?

बैंक खातों में लेन-देन बंद होने पर उन्हें उनकी स्थिति के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। नीचे दी गई तालिका से आप इसे बेहतर ढंग से समझ सकते हैं:

खाता स्थिति (Status)समय सीमा (Inactivity Period)ब्याज और विवरण
निष्क्रिय (Inoperative/Dormant)2 वर्षयदि 2 साल तक ग्राहक द्वारा कोई लेन-देन न किया जाए। इस पर बैंक की दर से ब्याज मिलता रहता है।
लावारिस (Unclaimed)10 वर्षयदि 10 साल तक खाते में कोई गतिविधि न हो या FD मैच्योर होने के बाद दावा न किया जाए।
DEA फंड में स्थानांतरण10 वर्ष के बाद10 साल की निरंतर निष्क्रियता के बाद, यह पैसा आरबीआई के Depositor Education and Awareness (DEA) फंड में भेज दिया जाता है।

3. UDGAM पोर्टल: अपना पैसा खोजने का डिजिटल समाधान

आरबीआई ने आपकी जमा राशि को खोजने के लिए UDGAM (Unclaimed Deposits-Gateway to Access inforMation) पोर्टल शुरू किया है। यह पोर्टल वर्तमान में 30 प्रमुख बैंकों को कवर करता है, जो कुल लावारिस राशि का लगभग 90% है।

पोर्टल पर खोजने की प्रक्रिया:

  1. पंजीकरण: udgam.rbi.org.in पर जाकर अपना नाम और मोबाइल नंबर दर्ज करें।
  2. व्यक्तिगत खोज (Individuals): खाताधारक का नाम और बैंक का चयन करें। इसके साथ PAN, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट या जन्म तिथि (DOB) में से कोई एक जानकारी दर्ज करें।
  3. गैर-व्यक्तिगत खोज (Non-Individuals): संस्थाओं/कंपनियों के मामले में संस्था का नाम, बैंक का चुनाव और CIN (Corporate Identification Number), पैन, पंजीकरण तिथि या अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता (Authorized Signatory) का नाम आवश्यक होगा।
  4. वैकल्पिक विकल्प: यदि आपके पास ऊपर दिए गए पहचान पत्र नहीं हैं, तो आप पते (Address) का उपयोग करके भी खोज कर सकते हैं।

UDRN का महत्व: सफल खोज के बाद, आपको एक UDRN (Unclaimed Deposit Reference Number) प्राप्त होगा। यह एक विशिष्ट नंबर है जो बैंक में दावा करते समय अनिवार्य होगा।

4. पैसे वापस पाने की 5-चरणीय प्रक्रिया

एक बार जब आप अपना पैसा ट्रैक कर लेते हैं, तो उसे वापस पाने के लिए इन चरणों का पालन करें:

  1. बैंक शाखा का चयन: आप अपनी मूल शाखा या बैंक की किसी भी अन्य शाखा (Choice of branch) में जा सकते हैं। एसबीआई जैसे बैंक अब ऑनलाइन दावा करने की सुविधा भी देते हैं।
  2. KYC दस्तावेजों का नवीनीकरण: आपको अपने नवीनतम फोटो, पहचान प्रमाण (Aadhaar, PAN, Voter ID) और पते का प्रमाण जमा करना होगा।
  3. दावा फॉर्म और UDRN: बैंक द्वारा निर्धारित ‘Unclaimed Deposits Claim Form’ भरें और UDGAM से प्राप्त UDRN का उल्लेख करें।
  4. वारिस या नॉमिनी के लिए प्रक्रिया: यदि खाताधारक की मृत्यु हो गई है, तो मृत्यु प्रमाण पत्र और कानूनी दस्तावेज (जैसे Succession Certificate) जमा करने होंगे।
    • विशेष नियम: ₹15 लाख तक के दावों के लिए प्रक्रिया सरल है और इसमें किसी ज़मानत (Surety) की आवश्यकता नहीं होती। लेकिन यदि दावा ₹15 लाख से अधिक है, तो बैंक आपसे अतिरिक्त दस्तावेज़ (Annex I-C के तहत Surety) मांग सकता है।
  5. सत्यापन और भुगतान: बैंक के सत्यापन के बाद, पैसा आपके सक्रिय खाते में ट्रांसफर कर दिया जाएगा।

5. ब्याज की गणना: क्या आपका पैसा बढ़ता रहेगा?

हाँ, आपका पैसा DEA फंड में जाने के बाद भी सुरक्षित रहता है और उस पर ब्याज मिलता है।

  • नियम: आरबीआई के अनुसार, लावारिस सावधि जमा (FD) पर ‘बचत खाते की ब्याज दर’ या ‘अनुबंधित दर’ (FD की मूल दर) में से जो भी कम हो, वह लागू होगी।
  • उदाहरण से समझिए: मान लीजिए आपकी पुरानी FD पर 7% ब्याज तय था। आज बैंक की बचत दर 3.5% है और वर्तमान FD दर 5% है। इस स्थिति में आपको 3.5% (सबसे कम दर) के हिसाब से ब्याज मिलेगा। यदि आपकी मूल FD दर केवल 3% थी, तो आपको 3% ही ब्याज मिलेगा।

6. महत्वपूर्ण अभियान: ‘आपका पैसा, आपका अधिकार’

भारत सरकार और आरबीआई वर्तमान में लावारिस राशि को उनके मालिकों तक पहुँचाने के लिए दो बड़े अभियान चला रहे हैं:

  • ‘आपका पैसा, आपका अधिकार’ अभियान: वित्त मंत्रालय द्वारा अक्टूबर से दिसंबर 2025 तक यह तीन महीने का राष्ट्रव्यापी अभियान चलाया जा रहा है। इसमें विशेष प्रदर्शनियों और स्टालों के माध्यम से नागरिकों को ‘ऑन-द-स्पॉट’ मार्गदर्शन और डिजिटल डेमो दिया जा रहा है।
  • आरबीआई प्रोत्साहन योजना: आरबीआई की यह योजना सितंबर 2026 तक चलेगी। इसके तहत बैंकों को पुराने दावों को तेजी से निपटाने और निष्क्रिय खातों को फिर से सक्रिय करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

7. निष्कर्ष और सुझाव: जागरूक बनिए, सतर्क रहिए!

एक विशेषज्ञ के रूप में मेरा सुझाव है कि आज ही अपने परिवार के साथ बैठकर एक ‘Financial Audit’ करें। पुराने कागजात चेक करें और देखें कि क्या कोई पुरानी पासबुक या FD सर्टिफिकेट कहीं छूट तो नहीं गया।

भविष्य के लिए सुरक्षा उपाय:

  • अपने सभी बैंक खातों में नामांकन (Nomination) अपडेट रखें।
  • पते या मोबाइल नंबर में बदलाव होने पर बैंक को तुरंत सूचित करें।
  • खातों को सक्रिय रखने के लिए साल में कम से कम एक बार लेनदेन जरूर करें।

जागरूक बनिए, सतर्क रहिए!

8. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: क्या नाबालिगों (Minors) के खाते भी लावारिस हो सकते हैं? उत्तर: हाँ, यदि नाबालिग के खाते में निर्धारित समय (10 वर्ष) तक कोई ग्राहक-प्रेरित लेनदेन नहीं होता है, तो उसे भी ‘लावारिस’ माना जाता है और पैसा DEA फंड में भेज दिया जाता है।

प्रश्न 2: क्या बैंक लावारिस पैसे को जब्त कर सकता है? उत्तर: बिल्कुल नहीं। जमाकर्ता या उनके कानूनी वारिस अनिश्चित काल तक कभी भी इस पैसे पर दावा कर सकते हैं।

प्रश्न 3: क्या लावारिस खाते से मेरे क्रेडिट स्कोर पर असर पड़ता है? उत्तर: नहीं, खाते के निष्क्रिय या लावारिस होने का आपके क्रेडिट स्कोर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

प्रश्न 4: क्या मैं बिना पासबुक के पैसे वापस पा सकता हूँ? उत्तर: हाँ, यदि मूल पासबुक खो गई है, तो आप बैंक को वैकल्पिक पहचान पत्र (OVD) और खाता विवरण देकर दावा प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।

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